कमलापुर शुगर फैक्ट्री: विकास की राह में ‘घोटाले’ की रुकावट

Apr 14, 2026 - 18:36
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कमलापुर शुगर फैक्ट्री: विकास की राह में ‘घोटाले’ की रुकावट

सीतापुर। के कमलापुर स्थित शुगर फैक्ट्री का पुनः संचालन क्षेत्र के गन्ना किसानों और आमजन के लिए एक नई आशा लेकर आया है। लंबे समय से बंद पड़ी इस इकाई के दोबारा शुरू होने से जहां किसानों को अपने गन्ने की बिक्री की चिंता कम हुई है, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद जगी है। एन आर इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सफल ट्रायल के बाद क्षेत्र में विकास की नई उम्मीदें जगी थीं।

किन्तु इस सकारात्मक तस्वीर के पीछे एक गंभीर और चिंताजनक परिदृश्य भी उभरकर सामने आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, फैक्ट्री के भीतर कार्यरत कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि अंदरखाने में ऐसी गतिविधियां हो रही हैं, जो फैक्ट्री की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रही हैं।

इतिहास भी इस बात का साक्षी है कि पूर्व में लापरवाही और संदिग्ध प्रबंधन के कारण यह फैक्ट्री भारी नुकसान में पहुंची थी और नीलामी तक की नौबत आ गई थी। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इसे नया जीवन मिला, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए एक बार फिर वही आशंकाएं जन्म लेने लगी हैं।

हाल ही में सामने आए कथित 498 ड्रम डीजल घोटाले ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। कागजों में 500 ड्रम की एंट्री और वास्तविकता में मात्र 2 ड्रम का पाया जाना, एक बड़ी अनियमितता की ओर संकेत करता है। इस मामले की शिकायत एक सुपरवाइजर द्वारा सीजीएम (मुख्य महाप्रबंधक) के समक्ष की गई, लेकिन आरोप है कि इस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इससे प्रबंधन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, फैक्ट्री के सुरक्षा विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी की कार्यशैली को लेकर भी कर्मचारियों में असंतोष देखा जा रहा है। आरोप यह भी है कि सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों के रोटेशन में पारदर्शिता की कमी है, जिससे कुछ चुनिंदा लोगों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

कर्मचारियों का यह भी कहना है कि जो लोग अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें हटा दिया जाता है। अब तक कई अनुभवी और ईमानदार सुपरवाइजरों को बाहर किए जाने की चर्चाएं भी सामने आई हैं, जिससे कार्यस्थल का वातावरण प्रभावित हो रहा है।

स्थानीय किसानों और क्षेत्रीय लोगों में इस स्थिति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो फैक्ट्री फिर से आर्थिक संकट या दिवालियापन की ओर बढ़ सकती है।

अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि एन आर इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है? क्या कंपनी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए निष्पक्ष जांच कराएगी, या फिर ये आरोप यूं ही अनदेखे रहेंगे?

निष्कर्षतः, कमलापुर शुगर फैक्ट्री का भविष्य केवल उत्पादन पर नहीं, बल्कि ईमानदार प्रबंधन, पारदर्शिता और जवाबदेही पर निर्भर करता है। आवश्यक है कि कंपनी प्रबंधन, शासन और संबंधित उच्चाधिकारी इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएं, ताकि किसानों की उम्मीदें और क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ सुरक्षित रह सके।

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Bahumulya Janta बहुमूल्य जनता राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र, सीतापुर उत्तर प्रदेश से प्रकाशित।